दोहा : श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।। बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।। चौपाई : जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।। महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।। कंचन बरन बिराज ...
Read More »शुक्रवार स्पेशल : माँ भगवती की सम्पूर्ण आराधना : Maa Bhagwati Ki Aradhna : देवी आराधना
श्री दुर्गा चालीसा : नमो नमो दुर्गे सुख करनी…
श्री दुर्गा चालीसा नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूं लोक फैली उजियारी॥ शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥ रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे॥ तुम संसार शक्ति लै कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना॥ अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥ प्रलयकाल ...
Read More »सन्तोषी माता की आरती
जय सन्तोषी माता, मैया जय सन्तोषी माता। अपने सेवक जन की सुख सम्पति दाता ।। जय सन्तोषी माता…. सुन्दर चीर सुनहरी मां धारण कीन्हो। हीरा पन्ना दमके तन श्रृंगार लीन्हो ।। जय सन्तोषी माता…. गेरू लाल छटा छबि बदन कमल सोहे। मंद हंसत करुणामयी त्रिभुवन जन मोहे ।। जय सन्तोषी माता…. स्वर्ण सिंहासन बैठी चंवर दुरे प्यारे। धूप, दीप, मधु, ...
Read More »मां दुर्गा जी की आरती : जय अम्बे गौरी…
दुर्गा आरती जय अम्बे गौरी मैया जय मंगल मूर्ति । तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिव री ॥टेक॥ मांग सिंदूर बिराजत टीको मृगमद को । उज्ज्वल से दोउ नैना चंद्रबदन नीको ॥जय॥ कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला कंठन पर साजै ॥जय॥ केहरि वाहन राजत खड्ग खप्परधारी । सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुःखहारी ॥जय॥ कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे ...
Read More »Shree Shiv Chalisa (श्री शिव चालीसा)
श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥ जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥ भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥ अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन छार लगाये॥ वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥1॥ मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥ कर ...
Read More »मां सरस्वती की आरती
ॐ जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता। सद्गुण वैभवशालिनी, त्रिभुवन विख्याता ॥ जय. ॥ चंद्रवदनि पद्मासिनी, द्युति मंगलकारी। सोहे हंस-सवारी, अतुल तेजधारी ॥ जय. ॥ बाएं कर में वीणा, दूजे कर माला। शीश मुकुट-मणि सोहे, गले मोतियन माला ॥ जय. ॥ देव शरण में आए, उनका उद्धार किया। पैठि मंथरा दासी, असुर-संहार किया ॥ जय. ॥ वेद-ज्ञान-प्रदायिनी, बुद्धि-प्रकाश करो। ...
Read More »ललिता माता की चालीसा
॥चौपाई॥ जयति जयति जय ललिते माता। तव गुण महिमा है विख्याता॥ तू सुन्दरी, त्रिपुरेश्वरी देवी। सुर नर मुनि तेरे पद सेवी॥ तू कल्याणी कष्ट निवारिणी। तू सुख दायिनी, विपदा हारिणी॥ मोह विनाशिनी दैत्य नाशिनी। भक्त भाविनी ज्योति प्रकाशिनी॥ आदि शक्ति श्री विद्या रूपा। चक्र स्वामिनी देह अनूपा॥ ह्रदय निवासिनी-भक्त तारिणी। नाना कष्ट विपति दल हारिणी॥ दश विद्या है रुप तुम्हारा। ...
Read More »श्री सरस्वती चालीसा
॥दोहा॥ जनक जननि पद कमल रज, निज मस्तक पर धारि। बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥ पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु। रामसागर के पाप को, मातु तुही अब हन्तु॥ माता-पिता के चरणों की धूल मस्तक पर धारण करते हुए हे सरस्वती मां, आपकी वंदना करता हूं/करती हूं, हे दातारी मुझे बुद्धि की शक्ति दो। आपकी अमित और अनंत महिमा पूरे ...
Read More »श्री चित्रगुप्त जी की आरती
ॐ जय चित्रगुप्त हरे, स्वामी जय चित्रगुप्त हरे। भक्त जनों के इच्छित, फल को पूर्ण करे॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥ विघ्न विनाशक मंगलकर्ता, सन्तन सुखदायी। भक्तन के प्रतिपालक, त्रिभुवन यश छायी॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥ रूप चतुर्भुज, श्यामल मूरति, पीताम्बर राजै। मातु इरावती, दक्षिणा, वाम अङ्ग साजै॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥ कष्ट निवारण, दुष्ट संहारण, प्रभु अन्तर्यामी। सृष्टि संहारण, जन ...
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