II आध्यात्म II

ज्योतिर्विद रविशराय गौड़ से जानिये, तर्पण कब, कैसे और क्यूँ करे ?

सरल तर्पण विधि , वैदिक वांग्मय में ऋषियों ने प्रतिदिन किया जाने वाला कर्म कहा जो मनुष्य को सर्व सुख के साथ अत्यंत ,आनंद की प्राप्ति कराता है। तर्पण कर्मकांड का वह अद्भुद कर्म जिसके करने से समस्त देव, ऋषि और पितरों को तृप्त करने या संतुष्ट करने की क्रिया हो जाती है कुछ बंधुओ को ऐसा लगता हैं यह ...

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मनुस्मृति की संरचना एवं विषयवस्तु

मनुस्मृति सनातन-हिंदू आचार-संहिता का विश्वकोश है… मनुस्मृति में बारह अध्याय तथा दो हजार पाँच सौ श्लोक हैं… जिनमें सृष्टि की उत्पत्ति, संस्कार, नित्य और नैमित्तिक कर्म, आश्रमधर्म, वर्णधर्म, राजधर्म व प्रायश्चित आदि विषयों का उल्लेख है। (१) जगत् की उत्पत्ति (२) संस्कारविधि, व्रतचर्या, उपचार (३) स्नान, दाराघिगमन, विवाहलक्षण, महायज्ञ, श्राद्धकल्प (४) वृत्तिलक्षण, स्नातक व्रत (५) भक्ष्याभक्ष्य, शौच, अशुद्धि, स्त्रीधर्म (६) ...

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रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा में रोहिणी का योग होने से मार्कण्डेय और सत्याभामा योग इस करवा चौथ पर बन रहा है

आज करवा चौथ का व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण है 70 वर्ष बाद करवा चौथ पर इस बार शुभ संयोग बन रहा है. इस बार रोहिणी नक्षत्र के साथ मंगल का योग होना करवा चौथ को अधिक मंगलकारी बना रहा है रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा में रोहिणी का योग होने से मार्कण्डेय और सत्याभामा योग इस करवा चौथ पर बन रहा है. ...

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अध्यात्म के मार्ग के चार पद, जानकर हैरान रह जाएंगे

जब कोई व्यक्ति अध्यात्म या ध्यान के मार्ग पर चलने लगता है और वह निरंतर उसी मार्ग पर चलता रहता है तो उसे उस मार्ग में जो उपलब्धियां मिलती है उसे विद्वानों ने सांसारिक भाषा में पद और आध्यात्म की भाषा में मोक्ष, मुक्ति या समाधि की स्थितियां या ज्ञान कहा है। आखिर यह पद कितने और क्या होते हैं आओ इसे ...

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