II आरती संग्रह II

श्री चित्रगुप्त जी की आरती

ॐ जय चित्रगुप्त हरे, स्वामी जय चित्रगुप्त हरे। भक्त जनों के इच्छित, फल को पूर्ण करे॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥ विघ्न विनाशक मंगलकर्ता, सन्तन सुखदायी। भक्तन के प्रतिपालक, त्रिभुवन यश छायी॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥ रूप चतुर्भुज, श्यामल मूरति, पीताम्बर राजै। मातु इरावती, दक्षिणा, वाम अङ्ग साजै॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥ कष्ट निवारण, दुष्ट संहारण, प्रभु अन्तर्यामी। सृष्टि संहारण, जन ...

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मां सरस्वती की आरती

ॐ जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता। सद्‍गुण वैभवशालिनी, त्रिभुवन विख्याता ॥ जय. ॥ चंद्रवदनि पद्मासिनी, द्युति मंगलकारी। सोहे हंस-सवारी, अतुल तेजधारी ॥ जय. ॥ बाएं कर में वीणा, दूजे कर माला। शीश मुकुट-मणि‍ सोहे, गले मोतियन माला ॥ जय. ॥ देव शरण में आए, उनका उद्धार किया। पैठि मंथरा दासी, असुर-संहार किया ॥ जय. ॥ वेद-ज्ञान-प्रदायिनी, बुद्ध‍ि-प्रकाश करो। ...

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