गोरी ने अपना घोड़ा मुल्तान पहुंचकर ही रोका, वह एक महिला में अपनी मौत देखकर आया था

“मैं तुम्हारी रानी की खूबसूरती सुनते हुए आया हूँ! सुना है रानी का पति भी मर गया है, और है ही क्या उसके पास एक छोटा बच्चा! मेरे सामने इतने बड़े बड़े राजा हार गए, फिर यह रानी क्या चीज़ है! उससे बोलो, मेरे पास आए तो जान बख्श दूंगा! नहीं तो!” हिन्दुस्तान में अपनी क्रूरता से नई कहानियां लिखने वाले मोहम्मद गोरी ने गुजरात के सेनापति से कहा, जो नायिकी देवी की तरफ से बात करने आया था. 

“हमने यह भी सुना है कि हमारी बड़ी सेना को देखते हुए कोई बड़ा राजा तुम्हारी रानी की मदद करने नहीं आ रहा! इसलिए भलाई इसी में है कि रानी चुपचाप आ जाए!” सेनापति के माध्यम से गोरी के बोल ज्यों ज्यों रानी के कानों में पड़ते जा रहे थे रानी का क्रोध बढ़ता जा रहा था!

“क्या इसी कारण मैंने अस्त्र और शस्त्र का प्रशिक्षण लिया है? क्या विदेशी आक्रान्ताओं के हाथों पड़ना ही नियति है? नहीं! नहीं! भारत भूमि को अपवित्र करने वाले को ऐसा दंड दिया जाएगा कि वह दूसरी स्त्री की तरफ आंख उठाना भूल जाएगा! उस दुष्ट तक संदेशा भिजवाया जाए कि मैं उससे मिलने आ रही हूँ!” और गुजरात की विधवा नायिकी रानी अपने नन्हे बच्चे को पीठ पर बांधकर तलवार बाज़ी का अभ्यास करने चल दी!

उसकी तलवार जितनी आग उगलती उसकी क्रोध की आग उतनी ही बढ़ती जाती! आँखों में पति अजयपाल के साथ बिताए क्षण सामने आते! सोलंकी राजा अजयपाल के असमय निधन से राज्य उबर ही नहीं पाया था कि दुष्ट गोरी की नज़र राज्य पर पड़ गयी!

गोरी के भीतर जितनी हवस जमीन और पैसे की थी उतनी ही हवस शरीर की थी. उसकी निगाह से कोई खूबसूरत लड़की नहीं बच पाती थी. लड़की, लौंडे सबका शौक था उसे! इस रानी को शिकार बनाऊंगा और उसके बेटे को लौंडा बना लूँगा, गोरी के मन में लड्डू फूट रहे थे. मगर उसे यह नहीं पता था कि यह हिन्द की जमीन बेटियों को ऐसा बनाती है कि आँखें नोंच लें! जो हाथ उसकी तरफ बढ़ें, उसके हाथ काट दें! 

नायिकी देवी ने योजना बना ली थी. हर तरफ सहायता की गुहार लगाने के बाद भी जब केवल चालुक्य वंश से ही सैन्य सहायता मिली तो उसने अपनी योजना में परिवर्तन किया. सेना को घेरकर मारने की योजना बनी! उसने कायदारा में सेना को बुलाया और संदेशा भिजवा दिया कि बोल दो मैं आ रही हूँ! उधर गोरी अपनी हवस पूरी करने के लिए तमाम ख्यालों में खोया हुआ था. जैसे ही वह ख्यालों से बाहर आया उसे अपने सामने एक अत्यंत ही खूबसूरत महिला को देखा, जिसकी पीठ पर एक बच्चा बंधा था. उस महिला के हाथ में तलवार थी.

उस महिला के मुंह से निकला “जय द्वारकाधीश!” और जैसे द्वारकाधीश ही उस रानी पर सवार हो गए हों! रानी ने गाजर मूली की तरह असावधान सैनिकों को काटना शुरू कर दिया. जब तक गोरी समझ पाता तब तक उसने देखा कि उसके पीछे से सेना आ रही है और उसकी सेना तीन तरफ से घिर चुकी है! राजपूतों ने जय द्वारकाधीश बोलते हुए उन्हें काटना शुरू कर दिया. गोरी को यह समझ नहीं आ रहा था कि काफिर इतने बहादुर कैसे हो सकते हैं?

एक तरफ वह अपनी सेना को कटते हुए देख रहा था और दूसरी तरफ उस रूपवान महिला को. जिसकी तलवार अब उसकी तरफ बढ़ रही थी. गोरी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे? तभी रानी की आवाज़ गूंजी! “तुझे बहुत शौक है न, औरतों को गले लगाने का! आज न तेरी गर्दन बचेगी और न तू किसी को गले लगा पाएगा!”

सन 1170, वह मैदान एक ऐसी घटना का साक्षी बनने जा रहा था, जिस घटना के बाद उस दुष्ट गोरी की हिम्मत पूरे 12 साल तक भारत की तरफ देखने की नहीं हुई, उस घटना के बाद गोरी की हिम्मत गुजरात की तरफ देखने की नहीं हुई! रानी के तलवार और मुख दोनों पर खून था! रानी के दांत खून से लाल हो चुके थे, रानी की तलवार को अब केवल गोरी की तलाश थी. रानी ने जैसे ही गोरी को अपने सामने पाया उसकी तलवार की प्यास बढ़ गयी और उसने गोरी पर हमला कर दिया! गोरी को मगर उसके कुछ अंगरक्षकों ने बचा लिया और तलवार का वार उसकी गर्दन पर न होकर उसके शरीर के निचले हिस्से अर्थात गुप्तांग पर हुआ! उस पुरुषांग पर प्रहार करती हुई रानी बोलती जा रही थी, “मलेच्छ तेरी औलादें भी न होंगी, तूने अब तक न जाने कितनी औरतों की कोख उजाड़ी है, तू निपूता रहेगा, निपूता!” रानी की तलवार के वार से बचाकर लहूलुहान गोरी को लेकर उसके सैनिक भाग निकले! 

कहते हैं, गोरी ने अपना घोड़ा मुल्तान पहुंचकर ही रोका, जब वह पहुंचा तो खून, मलमूत्र से सना था, और डर से भी! वह एक महिला में अपनी मौत देखकर आया था

रानी नायिकी देवी ने गुजरात को आक्रमण से बचाया, काश उस दिन गोरी के ख़ास सिपहसालार उसे बचाने आए न होते, मगर यह काश न होता तो
मगर रानी नायिकी इस कदर गुमनाम रहेगी यह न पता था. कहते हैं गोरी कभी बाप नहीं बन सका था, यह रानी के दिए घाव थे या किस्मत, द्वारिकाधीश ही जानते है

सोनाली मिश्र ( लेखिका एतिहासिक तथ्यों की जानकार है )

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